उत्तराखंड क्राइम

उत्तराखंड में साइबर ठगी की शिकायत होगी आसान, AI एजेंट संभालेगा 1930 हेल्पलाइन की कॉल

देहरादून। साइबर ठगी का शिकार होने वाले लोगों को अब राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की साइबर क्राइम पुलिस हेल्पलाइन पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित व्यवस्था का परीक्षण कर रही है। इस नई पहल का उद्देश्य एक साथ अधिक कॉल का जवाब देना, पीड़ितों से शुरुआती जानकारी जुटाना और शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया को तेज करना है। फिलहाल यह सुविधा हिंदी और अंग्रेजी में परीक्षण के तौर पर शुरू की गई है। भविष्य में गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी जैसी स्थानीय भाषाओं को भी इसमें शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

कॉल का दबाव कम करेगा AI एजेंट

साइबर ठगी के मामलों में समय पर शिकायत दर्ज कराना बेहद जरूरी होता है। ठगी की रकम दूसरे बैंक खातों में स्थानांतरित होने से रोकने के लिए पुलिस और संबंधित बैंकों को जल्द कार्रवाई करनी पड़ती है। हालांकि, एक ही समय में बड़ी संख्या में कॉल आने और कर्मचारियों की सीमित उपलब्धता के कारण पीड़ितों को कई बार इंतजार करना पड़ता है। AI आधारित व्यवस्था से कॉल का दबाव कम करने और शिकायतकर्ताओं को शुरुआती सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।

शिकायत के बाद मिलेगी आगे की जानकारी

नई व्यवस्था के तहत शिकायतकर्ता से फोन पर जरूरी जानकारियां ली जाएंगी। शुरुआती जानकारी जुटाने और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे संदेश भेजा जाएगा। जरूरत पड़ने पर पुलिस भी पीड़ित से संपर्क कर आगे की कार्रवाई में मदद करेगी।

एसपी साइबर शांतनु पाराशर ने इस व्यवस्था का प्रदर्शन करते हुए बताया कि हेल्पलाइन पर कॉल आने के बाद शिकायतकर्ता से किस तरह जानकारी ली जाएगी और प्रक्रिया पूरी होने पर उसे संदेश कैसे भेजा जाएगा। हालांकि, शिकायत दर्ज होने के बाद रकम वापस मिलने या पीड़ित को राहत मिलने में लगने वाला समय मामले की प्रकृति, उपलब्ध जानकारी और संबंधित बैंक की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।

बैंक खातों में रकम रोकने पर रहेगा जोर

एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह के मुताबिक, AI का इस्तेमाल पुलिस की कार्यक्षमता बढ़ाने और उपलब्ध कर्मचारियों का बेहतर उपयोग करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। शिकायत दर्ज करने और शुरुआती जानकारी जुटाने में कम समय लगने से पुलिसकर्मी बैंकों से समन्वय स्थापित करने, ठगी की रकम को खातों में होल्ड कराने और मामलों की आगे जांच करने पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

हालांकि, AI अपने आप किसी बैंक खाते में रकम होल्ड नहीं करेगा। इसके लिए पुलिस और संबंधित बैंक को निर्धारित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करनी होगी। ऐसे में शिकायतकर्ताओं के लिए ठगी का पता चलते ही 1930 पर संपर्क करना महत्वपूर्ण रहेगा।

डेटा सुरक्षा के लिए अलग सर्वर की योजना

हेल्पलाइन पर आने वाली कॉल में पीड़ितों की व्यक्तिगत जानकारी और बैंक खातों से जुड़े संवेदनशील विवरण हो सकते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए AI आधारित व्यवस्था के लिए अलग सर्वर तैयार करने की योजना है।

एसएसपी एसटीएफ के अनुसार, इस व्यवस्था को उपलब्ध कराने वाली कंपनी के साथ विधिवत समझौता किया जाएगा। इसमें कॉल से प्राप्त डेटा और संवेदनशील जानकारी को किसी तीसरे पक्ष के साथ साझा होने से बचाने के प्रावधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा। साथ ही, निर्धारित अवधि के बाद गैर-जरूरी डेटा हटाने की व्यवस्था भी बनाई जाएगी।

गढ़वाली और कुमाऊंनी में भी मिल सकती है मदद

फिलहाल AI आधारित हेल्पलाइन हिंदी और अंग्रेजी में काम करेगी। भविष्य में लोगों की जरूरतों और कॉल की प्रकृति का आकलन करने के बाद स्थानीय भाषाओं को शामिल करने पर विचार किया जाएगा। इसके लिए AI प्रणाली को गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी जैसी भाषाओं के अनुरूप प्रशिक्षित किया जा सकता है।

इस पहल से स्थानीय भाषा में अपनी समस्या बताने वाले लोगों को भी साइबर ठगी की शिकायत दर्ज कराने और शुरुआती मार्गदर्शन प्राप्त करने में आसानी हो सकती है। यदि परीक्षण सफल रहता है, तो यह व्यवस्था हेल्पलाइन पर बढ़ते कॉल के दबाव को कम करने और साइबर अपराध के पीड़ितों तक समय पर सहायता पहुंचाने में उपयोगी साबित हो सकती है।

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