नई दिल्ली

पत्रकारों को कवरेज से रोकने और हिरासत में लेने के आरोपों की जांच की मांग, प्रेस काउंसिल को लिखा पत्र

आईएपीएम ने तथ्य-जांच समिति गठित करने का किया अनुरोध, राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन सहयोगी बोले- प्रेस की स्वतंत्रता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी

नई दिल्ली। दिल्ली में प्रदर्शनों के दौरान मीडियाकर्मियों को कथित तौर पर कवरेज से रोकने और जबरन हिरासत में लेने के मामलों को लेकर इंडियन एसोसिएशन ऑफ प्रेस-एन-मीडियामेन (आईएपीएम) ने चिंता जताई है। संगठन ने भारतीय प्रेस परिषद की अध्यक्ष न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई को पत्र लिखकर मामले का संज्ञान लेने और आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए तथ्य-जांच समिति गठित करने की मांग की है।

आईएपीएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन सहयोगी की ओर से भेजे गए पत्र में कहा गया है कि हाल के दिनों में दिल्ली में आयोजित प्रदर्शनों के दौरान कुछ मीडियाकर्मियों के काम में कथित रूप से बाधा डालने और उन्हें हिरासत में लेने से जुड़े वीडियो तथा दावे सामने आए हैं। इस मुद्दे पर कई मीडियाकर्मियों और स्वतंत्र कंटेंट क्रिएटर्स ने प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी चिंताएं भी व्यक्त की थीं।

वीडियो फुटेज और पत्रकारों के बयान की जांच की मांग

आईएपीएम ने प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया से अनुरोध किया है कि मामले से संबंधित वीडियो फुटेज, उपलब्ध साक्ष्यों और प्रभावित मीडियाकर्मियों के बयानों की जांच कराई जाए। साथ ही संबंधित अधिकारियों का पक्ष भी सुना जाए, ताकि घटनाओं की वास्तविक परिस्थितियों का निष्पक्ष आकलन किया जा सके।

संगठन का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाएं और उचित सिफारिशें जारी की जाएं। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पत्रकार कानूनी प्रावधानों और उचित सुरक्षा प्रतिबंधों के दायरे में रहते हुए स्वतंत्र एवं सुरक्षित तरीके से अपने पेशेवर दायित्वों का निर्वहन कर सकें।

प्रेस की स्वतंत्रता और जवाबदेही पर जोर

आईएपीएम के राष्ट्रीय अध्यक्ष पवन सहयोगी ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पत्रकारों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। पत्रकार जनता तक सूचनाएं पहुंचाने और घटनाओं की वास्तविक स्थिति सामने लाने का काम करते हैं। ऐसे में उनके पेशेवर कार्यों में अनुचित बाधा नहीं आनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा संबंधी उपाय आवश्यक हो सकते हैं, लेकिन उनकी आड़ में पत्रकारों की रिपोर्टिंग को अनुचित रूप से बाधित नहीं किया जाना चाहिए। प्रेस की स्वतंत्रता की रक्षा, संबंधित पक्षों की जवाबदेही सुनिश्चित करने और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निष्पक्ष तथ्य-जांच जरूरी है।

संगठन ने प्रेस काउंसिल से मामले में हस्तक्षेप कर उपलब्ध तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई और आवश्यक सिफारिशें करने का अनुरोध किया है।

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