उत्तराखंड

करोड़ों खर्च, नतीजा सिफर: हेलंग–उर्गम मार्ग की सुध लेने वाला कोई नहीं

ज्योतिर्मठ

सड़क संपर्क मार्ग की बदहाल स्थिति के चलते पंच बदरी और पंच केदारों की पावन भूमि उर्गम घाटी आज भी शीतकालीन पर्यटकों को आकर्षित नहीं कर पा रही है। करीब तीन दशक बीत जाने के बावजूद हेलंग–उर्गम मोटर मार्ग की हालत दुरुस्त नहीं हो सकी है। नतीजा यह है कि चाहकर भी बड़ी संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु इस रमणीक घाटी तक नहीं पहुंच पा रहे हैं।

जनदेश के नेता लक्ष्मण सिंह नेगी ने अपने जीवन के लगभग तीन दशक इस मार्ग के सुधार की मांग को लेकर संघर्ष में खपा दिए, लेकिन सड़क की तस्वीर आज भी नहीं बदली। आंदोलनों और प्रदर्शनों के बाद यह मार्ग जरूर शुरू हुआ, पर शुरुआत से ही यह ठेकेदारों की मनमानी, घटिया निर्माण और हर मानसून में तबाही का शिकार रहा। वर्तमान हालात में यह मार्ग सुरक्षित यातायात के योग्य नहीं माना जा सकता।

उर्गम घाटी न केवल प्रकृति की अनमोल धरोहर है, बल्कि यहां पंच केदारों में शामिल भगवान कल्पनाथ और पंच बदरी में ध्यान बदरी का प्राचीन मंदिर स्थित है, जो वर्षभर श्रद्धालुओं के लिए खुले रहते हैं। इसके बावजूद सड़क की दुर्दशा के कारण शीतकालीन यात्रा और पर्यटन की दृष्टि से यह घाटी उपेक्षा का दंश झेल रही है।

पर्यटन विभाग की ओर से कल्पनाथ मंदिर के आसपास सौंदर्यीकरण, शोभा स्थली, पार्क और पर्यटक आवास गृह की योजनाएं प्रस्तावित की गई हैं, लेकिन इनका वास्तविक लाभ तभी मिल सकेगा, जब हेलंग–उर्गम सड़क मार्ग सुरक्षित और सुचारु यातायात के योग्य बनेगा। उर्गम घाटी से फ्यूंलानारायण, भनाई बुग्याल, उर्वसी मंदिर, मुलाखर्क, सुंदरवन और पल्ला गढ़ी जैसे कई रमणीक स्थलों तक ट्रैकिंग की अपार संभावनाएं हैं, जिनके लिए बेहतर सड़क और व्यापक प्रचार-प्रसार जरूरी है।

लंबी जद्दोजहद के बाद अब प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत हेलंग–उर्गम मार्ग के चौड़ीकरण और डामरीकरण के लिए करीब 13 करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसके अलावा लघु जल विद्युत निगम ने किमी दो से तीन के बीच अक्सर अवरुद्ध रहने वाले हिस्से की मरम्मत के लिए 84 लाख रुपये की धनराशि अवमुक्त कर अपने स्तर से कार्य शुरू किया है।

उर्गम घाटी संघर्ष समिति के अध्यक्ष राजेंद्र सिंह नेगी ने घाटी के अन्य ग्रामीण प्रतिनिधियों के साथ कार्यस्थल पर पहुंचकर कार्यदायी संस्थाओं से बातचीत की और सड़क मरम्मत, चौड़ीकरण व डामरीकरण कार्य उच्च गुणवत्ता के साथ किए जाने की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि सड़क को टिकाऊ बनाया जाए, ताकि हर वर्षात में होने वाली क्षति से बचते हुए वर्षभर आवागमन सुचारु रह सके।

अब करीब 14 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे इन कार्यों की गुणवत्ता और टिकाऊपन पर ही उर्गम घाटी के पर्यटन पर निर्भर लोगों की उम्मीदें टिकी हैं। देखना होगा कि इस बार खर्च की गई भारी-भरकम राशि वास्तव में घाटी की तकदीर बदल पाती है या नहीं।

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