उत्तराखंड नई दिल्ली

AI और हनी ट्रैप से बढ़ा खतरा: ITBP ने जवानों के लिए शुरू किया साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान

नई दिल्ली/देहरादून। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डिजिटल तकनीकों के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) ने अपने जवानों को साइबर खतरों से सुरक्षित रखने के लिए व्यापक साइबर स्वच्छता एवं साइबर सुरक्षा जागरूकता अभियान शुरू किया है। इस पहल के तहत सभी अंडर-कमांड फॉर्मेशन के कर्मियों को सोशल मीडिया, हनी ट्रैप, डीपफेक, फर्जी प्रोफाइल और ऑनलाइन जासूसी के नए तरीकों से सतर्क रहने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

इसी क्रम में शुक्रवार को आईटीबीपी के देहरादून परिसर में एक विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड पुलिस के एडिशनल एसपी अंकुश मिश्रा ने जवानों को एआई आधारित साइबर अपराध, बैंकिंग फ्रॉड, हनी ट्रैप और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े उभरते डिजिटल खतरों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

सोशल मीडिया बन रहा जासूसी का नया हथियार

सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, पारंपरिक जासूसी के तरीकों की जगह अब विदेशी खुफिया एजेंसियां सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और डेटिंग ऐप्स का इस्तेमाल कर सुरक्षा बलों के कर्मियों से संपर्क साध रही हैं। फर्जी पहचान बनाकर पहले विश्वास कायम किया जाता है और फिर धीरे-धीरे संवेदनशील सूचनाएं हासिल करने की कोशिश की जाती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, एआई तकनीक की मदद से वास्तविक दिखने वाली प्रोफाइल फोटो, आवाज की क्लोनिंग, डीपफेक वीडियो कॉल और व्यक्तिगत बातचीत तैयार करना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो गया है, जिससे ऐसे साइबर हमलों की पहचान करना चुनौतीपूर्ण बनता जा रहा है।

हनी ट्रैप और ऑनलाइन जाल से बचने की सलाह

आईटीबीपी ने जवानों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति की फ्रेंड रिक्वेस्ट स्वीकार न करें, संवेदनशील स्थानों या ड्यूटी से जुड़ी तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा न करें तथा किसी भी संदिग्ध ऑनलाइन संपर्क की तुरंत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दें।

साथ ही जवानों को मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड रखने, मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन (MFA) का उपयोग करने, नियमित रूप से सॉफ्टवेयर अपडेट करने तथा केवल विश्वसनीय स्रोतों से ही एप्लिकेशन डाउनलोड करने की सलाह दी गई है।

डिजिटल सुरक्षा भी अब राष्ट्रीय सुरक्षा का हिस्सा

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक समय में सीमा सुरक्षा केवल भौतिक मोर्चे तक सीमित नहीं रह गई है। सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और एआई आधारित साइबर हमले भी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौती बन चुके हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों के जवानों के लिए साइबर जागरूकता और डिजिटल सतर्कता उतनी ही आवश्यक है, जितनी उनकी शारीरिक और सामरिक तैयारी।

आईटीबीपी का यह अभियान जवानों को बदलते साइबर खतरों के प्रति जागरूक बनाने और देश की सुरक्षा व्यवस्था को डिजिटल स्तर पर भी मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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