देहरादून:
चमोली जनपद के उजिटिया गांव में गुलदार के लगातार हमलों से आक्रोशित ग्रामीणों का सब्र बुधवार को जवाब दे गया। मवेशियों के शिकार की सूचना के बावजूद वन विभाग की टीम के देर से पहुंचने पर ग्रामीणों ने एक फॉरेस्टर समेत 06 वनकर्मियों को रस्सियों से बांधकर करीब 02 घंटे तक बंधक बनाए रखा।
उजिटिया निवासी राजेंद्र मेहरा की गोशाला में मंगलवार देर रात गुलदार घुस आया था। अंदर बंधे मवेशियों पर हमला कर उसने एक गर्भवती गाय और 02 साल के बछड़े को मार डाला। बुधवार सुबह जब राजेंद्र की पत्नी कस्तूरा देवी चारा डालने गोशाला पहुंचीं, तो खून से लथपथ दोनों मवेशियों के शव देखकर उनके होश उड़ गए। घटना की खबर फैलते ही गांव में अफरा-तफरी मच गई।
सूचना के बाद भी वन विभाग की देरी, भड़का आक्रोश
ग्रामीणों का आरोप है कि घटना की जानकारी तुरंत वन विभाग को दी गई, लेकिन टीम सुबह करीब 09 बजे गांव पहुंची। इस देरी से ग्रामीणों, खासकर महिलाओं में भारी नाराजगी फैल गई। आरोप है कि विभाग का अमला केवल औपचारिकता निभाता है, जबकि ग्रामीणों की आजीविका पर संकट गहराता जा रहा है। इसी गुस्से में टीम को पकड़कर रस्सियों से बांध दिया गया।
“अल्मोड़ा में त्वरित कार्रवाई, चमोली में टालमटोल क्यों?”
ग्राम प्रधान दीपा देवी और क्षेत्र पंचायत सदस्य वीरेंद्र नेगी ने वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि अल्मोड़ा जिले में इसी तरह की घटनाओं के बाद तुरंत पिंजरा लगाकर गुलदार को पकड़ा गया, लेकिन उजिटिया और आसपास के गांवों में अनुमति देने में जानबूझकर देरी की जा रही है।
गुलदार का खौफ बढ़ा, नरभक्षी होने की आशंका
पिछले एक सप्ताह से क्षेत्र में गुलदार की दहशत बनी हुई है। जिला पंचायत सदस्य सुरेश बिष्ट ने आशंका जताई कि गुलदार नरभक्षी हो सकता है। हाल के दिनों में कई घटनाएं सामने आई हैं। जिसमें भंडारीखोड में तीन गायों का शिकार, उजिटिया में दिनदहाड़े पालतू कुत्ते पर हमला और रंगचौणा गांव में गोशाला के भीतर गाय के शिकार जैसी घटनाएं शामिल हैं। वहीं, कुमाऊं के अल्मोड़ा जिले में भी एक सप्ताह में कई मवेशियों के मारे जाने की सूचना है।
आश्वासन के बाद खत्म हुआ गतिरोध
करीब 02 घंटे तक चले तनाव के बाद जिला पंचायत सदस्य सुरेश बिष्ट मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्रामीणों को बताया कि डीएफओ से बात हो चुकी है और बुधवार शाम तक गांव में गुलदार को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाएगा। ठोस आश्वासन मिलने के बाद ही ग्रामीणों ने बंधक बनाए गए वन कर्मियों को रिहा किया।
