उत्तराखंड

स्कूलों की मनमानी पर प्रशासन सख्त, बुक सेलर्स पर छापे के बाद अब स्कूलों की बारी

रामनगर:

नैनीताल जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देश पर रामनगर में प्रशासन एक्शन मोड में नजर आया. देर शाम उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान के नेतृत्व में स्टेशनरी और बुक सेलरों की दुकानों पर आकस्मिक निरीक्षण किया गया. जिसमें स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर किताब और ड्रेस खरीदने के दबाव की शिकायतों की जांच की गई.

रामनगर में लगातार मिल रही शिकायतों के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है. उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने टीम के साथ शहर की विभिन्न किताब और स्टेशनरी दुकानों पर छापेमार कार्रवाई की. इस दौरान यह जांच की गई कि कहीं स्कूल छात्रों और अभिभावकों को किसी खास दुकान से किताबें खरीदने के लिए मजबूर तो नहीं कर रहे हैं या किसी निजी प्रकाशक की महंगी किताबें लेने का दबाव तो नहीं बनाया जा रहा.

निरीक्षण के दौरान तीन बुक सेलरों की दुकानों की गहनता से जांच की गई. यहां एनसीईआरटी की पुस्तकों के साथ-साथ अन्य प्रकाशनों की किताबें भी उपलब्ध मिलीं. दुकानदारों ने बताया कि वे स्कूलों द्वारा सुझाई गई किताबों के आधार पर ही स्टॉक रखते हैं.
हालांकि, जब मौके पर मौजूद अभिभावकों से बातचीत की गई तो उन्होंने अलग तस्वीर सामने रखी. अभिभावकों का कहना था कि स्कूलों की ओर से जो पर्चियां दी जाती हैं, उनमें केवल कक्षा का उल्लेख होता है, किसी विशेष किताब या प्रकाशक का नाम स्पष्ट रूप से नहीं लिखा होता.

उपजिलाधिकारी गोपाल सिंह चौहान ने साफ किया कि अब स्कूलों का भी निरीक्षण किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर बच्चों के स्कूल बैग की भी जांच की जाएगी. जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वास्तव में कौन-सी किताबें पढ़ाई जा रही हैं? क्या स्कूल प्रबंधन किसी खास प्रकाशक को बढ़ावा दे रहा है?

स्कूल ड्रेस के मुद्दे पर भी प्रशासन सख्त नजर आया. एसडीएम ने कहा कि ड्रेस के नाम पर ओवररेटिंग बिल्कुल बर्दाश्त नहीं की जाएगी. तय कीमत से ज्यादा वसूली करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन की इस कार्रवाई से साफ है कि अब शिक्षा के नाम पर हो रही मनमानी पर लगाम कसने की तैयारी है.

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